Wednesday, March 16, 2016
ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशन (जीएसएम) – Global System for Mobile Communication (GSM) in Hindi
यह एक ऐसे मंच की तरह है जिसने ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशन (जीएसएम) और कोड डिवीजन मल्टीपल एक्सेस (सीडीएमए) की खूबियों को साथ ला खड़ा किया है.। हालांकि अभी तक बाजार में ऐसे हैंडसेट गिने-चुने ही हैं, लेकिन पहल ग्राहकों को लुभाने वाली है.
सीडीएमए यानी कोड डिवीजन मल्टीपल एक्सेस, सेल्युलर तकनीक का ही एक रूप है जिसे आईएस-95 कहा जाता है। यह जीएसएम तकनीक की प्रबल प्रतिद्वंद्वी मानी जाती है। मूलतः इस तकनीक को सीडीएमए-1 कहा जाता है. मोबाइल फोन के तौर पर सीडीएमए तकनीक का इस्तेमाल आज ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. सीडीएमए टेलीकम्युनिकेशन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (टीआईए) द्वारा 1993 में स्वीकार की गई थी। सबसे पहले 1995 में इसका व्यवसायीकरण होने के बाद 1998 तक सीडीएमए-1 के उपभोक्ताओं का आँकड़ा 16 मिलियन तक पहुँच गया था.
विश्वभर में सीडीएमए की तीसरी पीढ़ी तकनीक जैसे मल्टी-कैरियर (1.25 मेगाहर्ट्ज बैंडविड्थ पर 2000 1एक्स एमसी और एचडीआर), 3एक्स एमसी 5 मेगाहर्ट्ज बैंडविड्थ तथा डायरेक्ट स्पीड (डब्ल्यूसीडीएमए 5 मेगाहर्ट्ज बैंडविड्थ) पर कार्य चल रहा है.
सीडीएमए एक मामले में जरूर मात खाता है वह है इंटरनेशनल रोमिंग. सीडीएमए फोन किसी भी तरह की मल्टीबैंड कैपिबिलिटी की सुविधा प्रदान नहीं करते हैं। ऐसे में आप विदेशों में इसका प्रयोग बहुत जगह नहीं कर पाते हैं। यही नहीं, आपको जीएसएम सिम (सब्सक्राइबर आइडेंटिटी मॉडय़ूल) खरीदने के लिए भी बड़ी जेहमत नहीं उठानी पड़ती और वही लोकप्रिय हो रहा है.
हालांकि बाजार के मामले में अभी सीडीएमए का ही डंका नहीं बोलता है पर आर-यूआईएम इनेबल होने के बाद और नेटवर्क करार होने के बाद बाजार में सीडीएमए भी फिर से छा सकता है। तकनीकी तौर पर फिलहाल बाजी जीएसएम के हाथ में है.
Subscribe to:
Post Comments
(
Atom
)
No comments :
Post a Comment